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भारत में न्याय की देवी का नाम क्या है...

भारत में न्याय की देवी का नाम क्या है...   बचपन से ही पढ़ते और सुनते आ रहे हैं - न्याय में असमानता न हो इसलिए वे आँख पर पट्‍टी बाँधकर ही न्याय तौलती हैं। लेकिन तराजू का पलड़ा सम है- यह कैसे पता चल पाता होगा उन्हें। आंखें तो बंद हैं न्याय तौलनेवाली पत्थर की देवी के। तो फिर केवल बयान, तर्क वितर्क सुनकर ही निर्णय कैसे हो सकेगा न्याय का। झूठ का पलड़ा भारी ही रहता है, तो फिर सच कैसे मजबूत होगा। प्रयास को सफलता मिलेगी कैसे? यह देखने सुनने के बाद भी न्याय अन्याय का फैसला कैसे किया जा सकता है? कानून और कचहरी का जब भी जिक्र होता है, हमारे आंखों के सामने सफेद धवल न्याय की देवी की एक मूरत सामने होती है। साथ ही दिखाई देती है – मूरत की आँखों पर बंधी काली पट्टी, एक हाथ में तराजू और दूसरे हाथ में तलवार धारी देवी की मोहक छवि। लेकिन भारत में न्याय की देवी का नाम क्या है, यह कोई नही जानता।         आँखों पर पट्टी का मतलब है सब को एक जैसा मानना, निष्पक्षता का पालन करना। तराजू का मतलब है किसी भी विषय या व्यक्ति के  गुण दोष को तौलना और फिर निर्णय देना। दूसरे देवी के हा...

नाम बदल कर काम करवाने का चलन

  नाम बदल कर काम करवाने का चलन आ ज कल का चलन हो गया है नाम बदल कर काम करवाने का। देखिए न पिछले कई दशकों सें पुराने शहरों के नाम बदले जा रहे हैं। हद तो यह है कि पिछली सरकारों के विकास दर भी बदले जा रहे हैं, विभागों के नाम बदले जा रहे हैं, योजनाओं के नाम तक बदल दिए गए। लेकिन किसी ने भी पुरानी दर पर न तो पेट्रोल मुहैया कराया, न तो सोना-चांदी के दाम ही कम कराए..इतना ही नहीं, पुरानी दर पर न तो किसी को प्रॉपर्टी मिल पा रही है और न ही जमीन जायदाद के दाम ही कम कर पाए हैं...जब पुराना ही लागू करना था तो जनता को जिसका लाभ मिलता, वह फैसला लिया जाता...   देखिए इलाहाबाद का पुराना नाम प्रयागराज था, उसे बदलकर साहब लोगों की पारटी ने प्रयागराज कर दिया। मुंबई का पुराना नाम बंबई और चेन्नई का पुराना नाम मद्रास था। कलकत्ता को कोलकाता बुलाया जाने लगा है। पुराने शहरों का नाम बदल दिया गया। देश के कई दूसरे शहरों के नाम भी बदले गए, लेकिन महान पार्टियों ने कभी पुराने पेट्रोल का दाम जो कभी 2 रुपए था, वह नहीं किया। सोने का दाम 250 रुपए तोला था, गेंहू-चावल 1 रुपये किलो मिलता था। उस कीमत पर महान स...

कलमकार के कई रूप यहां

कलमकार के कई रूप यहां कलमकार के कई रूप यहां कुछ नाम के कुछ काम के कुछ बिकते हैं कुछ लिखते यहां कुछ झुकते तो कुछ टूट ही जाते नाम है जिसका चाहे जितना कलम भी तीखी हो उसकी मुमकिन नहीं अाभासी इस दुनिया मे फरेब भी हो सकते हैं माया के बाजार में कलम भी देखो क्या रूप बदलती जादूगर के हाथ में पड़ कर हुनरमंद की कोई कदर नहीं सुनहरी स्याही मे तीखी कोई धार नहीं

कुछ सिरफिरे मुल्क में आग लगा रहे हैं

कुछ सिरफिरे मुल्क में आग लगा रहे हैं कुछ सिरफिरे मुल्क में आग लगा रहे हैं, कौन हैं वो अमन के स्वघोषित पुजारी जो मंदिरों-मस्जिदों में नफरत की आग जला रहे हैं मनसूबा ज़ालिमों का कामयाब न होगा राज ज़िन्दा रहेगी इंसानियत कैसे जब लोगों की अनायास ही जान जा रही है। बंद हो हैवानियत का नंगा नाच जाहिलों उस ईश्वर औ खुदा को मानते हो, जानते हो जिसे उसे क्या मुंह दिखाओगे 

कोई नहीं है सरहद के सिपाही से बड़ा

कोई नहीं है सरहद के सिपाही से बड़ा इक वो है जो संगीन लेकर मौत की छाती पर चढ़ा है। और अपने लहू से इस देश का महान इतिहास गढ़ा है। इक ये भी हैं, जो पत्थरों पर अपना माथा पटकते हैं, मंदिरों-मस्जिदों में जा-जाकर बूत पूजनेवालों ज़रा ध्यान से सुनो, कोई नहीं है सरहद के सिपाही से बड़ा। अपने स्वार्थ में होकर अंधे धृतराष्ट्र माफ नहीं करेगा तुम्हें कभी इतिहास बांटते हो इंसानों को लालच की खातिर परजीवी शैतान हो कपटी हो लालची भी। अन्नदाता औ देश का मजदूर भी देखो किस कदर हताश निराश हो रहे हैं रोज मौत को लगाते हैं गले अपनी तुम अट्टाहास करते हो जीत पर अपनी आर आऱ यादव

सरकारी फाइलों में मौत फंसी है झमेलों में

 सरकारी फाइलों में मौत                          फंसी है झमेलों में  सरकारी फाइलों में देखो तो मौत भी फंसी है पात्र और अपात्र के झमेलों में चुनकर भेजी गई सरकार के नुमाइंदे करते हैं कैसे कैसे अजूबे फैसले सरकारी फाइलों में अनगिनत लाशें आज भी राह देखते पड़ी है मुआवजों के फेरे में चुनकर भेजी गई सरकारों के नुमाइंदे देखो करते हैं कैसे कैसे अजूबे फैसले किसान अन्नदाता भी कहते हैं जिसे पाई पाई के लिए मुहताज खड़ा है सिसक रही हैं फसलें तैयार खेतों में घुटती हैं सिसकियां फाइलों के ढेरों में चुनकर भेजी गई सरकारों के नुमाइंदे बनकर दलाल खड़े हैं बांधे हाथ अपने कॉर्पोरेट चंद अमीरों के तहखाने में कैद हैं लक्ष्मी भी हरे हरे नोटों में साल भर में 781 किसान मरे हैं अब तक मौत उनकी भी होगी अब जांच के घेरे में सरकार ने कहा 483 मौत ही हैं असली साबित करो कि मरे हो मौत से अपनी मरना भी अब गुनाह हो गया है जैसे जब मौत ही खड़ी हो गई कटघरे में चुनकर भेजी गई सरकारों के नुमाइंदे फिर भी सेंकते हैं रोटी शवों के...

जल्लाद निजाम की खूनी साजिश...

जल्लाद निजाम की खूनी साजिश... जल्द ही एक नई स्टोरी पूरी होगी...नई फिल्लम भी बनेगी। क्या गजब का प्लॉट है...। सुनिए....ध्यान दीजिए...गौर फरमाइए...। कैसे लगी यह स्टोरी...बताइए जरूर...।  किसी राज्य में अचानक रहस्यमयी घटनाएं होने लगती हैं...। कोई समझ नहीं पाता ...हो क्या रहा है...।  एक राज्य का गृहमंत्री, राजनीति और सामाजिक विषयों पर अच्छी पकड़ भी...। लेकिन किसी महत्वाकांक्षी छुटभैये ने उस चतुर गृह मंत्री को फांस लिया। कभी राज्य के सीएम पद के दावेदार रहनेवाले गृह मंत्री की अचानक हत्या हो जाती है... वह भी तब, जब छुटभैया अचानक से सीएम की कुर्सी हथिया लेता है.... छुटभैया सीएम की महत्वाकांक्षा बढ़ती जाती है...युवा गृह मंत्री से तकरार भी....। इंजीनियर की डिग्री हासिल करनेवाले युवा गृहमंत्री की हत्या में शेयर बाजार में दलाली करनेवाले एक शख्स और सीएम का नाम सामने आता है...। शेयर मार्केट के दलाल के पास सीएम के कुछ गुप्त राज हैं....उस राज के बदले सीएम झुकता जाता है...। फ्लैश बैक में युवा गृह मंत्री की कहानी....          वह मुख्यमंत्री के दाहिने हाथ बन कर...